उदिलो अरुण

Aruṇodaya-kīrtana Part I-Udilo aruṇa (in Hindi)

उदिलो अरुण पूरब-भागे द्विजमणि गोरा अमनि जागे
भकत समूह लोइया साथे गेला नगर-ब्राजे

‘ताथै ताथै’ बाजलॊ खोल् घन घन ताहॆ झाजेर रोल्
प्रेमे ढलढल सोणार अंग चरणॆ नूपुर बाजे

मुकुंद माधव यादव हरि बोलेन बोलोरॆ वदन भोरि
मिछे निद-बशे गेलो रॆ राति दिवस शरीर साजे

एमन दुर्लभ मानव देहो पाइया कि कोरो भाव ना केहॊ
एबॆ ना भजिलॆ यशोदा सुत चरमॆ पोरिबॆ लाजे

उदित तपन हॊइलॆ अस्त दिन गॆलो बोलि हॊइबॆ ब्यस्त
तबॆ कॆनॊ एबे अलस होय् ना भज हृदॊय राजे

जीवन अनित्य जानह सार् ताहॆ नाना विध विपद-भार्
नामाश्रय कोरि जतनॆ तुमि थाकह आपन काजे

जीवेर कल्याण साधन काम् जगतॆ आसि’ ए मधुर नाम्
अविद्या तिमिर तपन रूपॆ हृद् गगनॆ बिराजे

कृष्ण-नाम-सुधा कोरिया पान् जुड़ाऒ भकति विनोद-प्राण्
नाम बिना किछु नाहिकॊ आरॊ चौद्द-भुवन माझे

ध्वनि

  1. श्री अमलात्म दास तथा भक्त वृन्द- इस्कॉन बैंगलोर