कबे ह’बे बोलो

Kabe Ha’be Bolo (in Hindi)

कबे ह’ बे बोलो से-दिन अमार्
(आमार्) अपराध घुचि’, शुद्ध नामे रुचि,
कृपा-बाले ह’ बे हृदोये संचार्

तृणाधिक हीन, कबे निजे मानि’,
सहिष्णुता-गुण हृदयेते आनि’
सकले मानद, आपनि अमानी,
हो’ ये आस्वादिबो नाम-रस-सार्

धन जन आर, कोबिता-सुंदरी,
बोलिबो ना चाहि देहो-सुख-करी
जन्मे जन्मे दाओ, ओहे गौरहरि
अहैतुकी भक्ति चरणे तोमार्

(कबे) कोरिते श्री-कृष्ण-नाम उच्चारण
पुलकित देहो गद्गद वचन
बैबर्ण्य-बेपथु ह’ बे संघटन,
निरंतर नेत्रे ब’बे अश्रु-धार्

कबे नवद्वीपे, सुरधुनी-तटे,
गौर-नित्यानंद बोलि’ निष्कपटॆ
नाचिया गाइया, बेडाइबो छुटे,
बातुलेर प्राय छाडिया बिचार्

कबे नित्यानंद मोरे कोरि’ दोया’,
छाडाइबो मोर विषयेर माया
दिया मोरे निज-चरणेर छाया,
नामेर हाटेते दिबे अधिकार्

किनिबो लुटिबो हरि-नाम-रस,
नाम-रसे मति’ होइबो बिबश
रसेर रसिक-चरण परश,
कोरिया मोजिबो रसे अनिबार्

कबे जीबे दोया, होइबे उदोय,
निज-सुख भुलि’ सुदीन-हृदोय
भकतिविनोद, कोरिया बिनोय,
श्री-आज्ञा-टहल कोरिबे प्रचार्

ध्वनि

  1. श्री अमलात्म दास तथा भक्त वृन्द- इस्कॉन बैंगलोर