गोपीनाथ

Gopīnātha (in Hindi)

भाग-1
गोपिनाथ्, मम निवेदन शुनो
विषयी दुर्जन, सदा काम-रत,
किछु नाहि मोर गुण

गोपीनाथ्, आमार भरसा तुमि
तोमार चरणे, लोइनु शरण,
तोमार किंकॊर आमि

गोपीनाथ्, कॆमोने शोधिबे मोरे
ना जानि भकति, कर्मे जड-मति,
पोडेछि संसार-घोरे

गोपीनाथ्, सकलि तोमार माया
नाहि मम बल, ज्ञान सुनिर्मल,
स्वाधीन नहे ए काया

गोपीनाथ्, नियत चरणे स्थान
मागे ए पामर, कान्डिया कान्डिया,
कॊरोहे करुणा दान

गोपीनाथ्, तुमि तो’ सकलि पारो
दुर्जने तारिते, तोमार शकति,
के आछे पापीर आरो

गोपीनाथ्, तुमि कृपा-पाराबार
जीवेर कारणे, आसिया प्रपंचे
लीला कोइले सुबिस्तार

गोपीनाथ्, आमि कि दोषे दोषी
असुर सकल, पाइलो चरण,
विनोद थाकिलो बोसि’

भाग -2
गोपीनाथ्, घुचाओ संसार-ज्वाला
अविद्या-जातना, आरो नाहि सहे,
जनम-मरण-माला

गोपीनाथ्, आमि तो’ कामेर दास
विषय-बासना, जागिछे हृदॊये,
फाडिछे करम फास

गोपीनाथ्, कबे वा जागिबो आमि
काम-रूप अरि, दूरे तेयागिबो,
हृदॊये स्फुरिबे तुमि

गोपीनाथ् आमि तो’ तोमार जन
तोमारे, छाडिया, संसार भजिनु,
भुलिया आपन-धन

गोपीनाथ्, तुमि तो’ सकलि जानो
आपनार जने, दण्डिया एखनो
श्री-चरणे, देहो स्थानो

गोपीनाथ्, एइ कि, विचार तब
बिमुख देखिया, छाडो निज-जने,
न कोरो’करुणा-लब

गोपीनाथ्, आमि तो’ मूरख अति
किसे भालो होय, कभु ना बुझिनु,
ताइ हेनो मम गति

गोपीनाथ्, तुमि तो’ पण्डित-बर
मूढेर मंगल, तुमि अन्वेषिबे
ए दासे ना भावो’पर

भाग -3
गोपीनाथ्, आमार उपाय नाइ
तुमि कृपा कोरि’, आमारॆ लोइले,
संसारे उद्दार पाइ

गोपीनाथ्, पोडेछि मायार फेरे
धन, दार, सुत, घिरेछे आमारे,
कामेते रेखेछे जेरे

गोपीनाथ्, मन जे पागल मोर
ना माने शासन, सदा अचेतन,
विषये रो’येछे घोर

गोपीनाथ्, हार जे मेनेछि आमि
अनेक जनत, होइलो बिफल,
एखनो भरसा तुमि

गोपीनाथ्, केमोने होइबे गति
प्रबल इंद्रिय बोशी-भूत मन,
ना छाडे विषय-रति

गोपीनाथ्, हृदोये बोसिया मोर
मनके शमिया, लहो निज पाने,
घुचिबे विपद घोर

गोपीनाथ्, अनाथ देखिया मोरे
तुमि, हृषिकेश, हृषीक दमिया,
तारो’हे संसृति-घोरे

गोपीनाथ्, गलाय लेगेछे फास
कृपा-आसि धोरि’, बंधन छेदिया,
विनोदे कोरोहो दास

ध्वनि

  1. श्री अमलात्म दास तथा भक्त वृन्द- इस्कॉन बैंगलोर