मानस देह गेह

Mānasa Deha Geha (in Hindi)

मानस, देहो, गेहो, जो किछु मोर्
अर्पिलु तुवा पदे, नन्द-किशोर्

संपुदे विपदे, जीवने-मरणे
दाय् मम गेला, तुवा ओ-पद बरणे

मारोबि राखोबि-जो इच्छा तोहारा
नित्य-दास प्रति तुवा अधिकारा

जन्माओबि मोए इच्छाजदि तोर्
भक्त-गृहे जनि जन्म हउ मोर्

कीट-जन्म हउ जथा तुवा दास्
बहिर्मुख ब्रह्म-जन्मे नाहि आश्

भक्ति-मुक्ति-स्पृहा विहीन जे भक्त
लभइते ताको संग अनुरक्त

जनक, जननी, दयित, तनय्
प्रभु, गुरु, पति-तुहू सर्व-मोय्

भकतिविनोद कोहे शुनो कान!
राधा-नाथ! तुहु हामार पराण

ध्वनि

  1. श्री अमलात्म दास तथा भक्त वृन्द- इस्कॉन बैंगलोर