विभावरी शेष

Vibhāvarī Śeṣa (in Hindi)

विभावरी शेष आलोक-प्रवेश,
निद्राचाडि’ उठो जीव
बोलो हरि हरि, मुकुंद मुरारि,
राम कृष्ण हयग्रीव

नृसिंह वामन, श्री मधुसूधन,
ब्रजेंद्र नंदन श्याम
पूतना-घातन कैटभ-शातन
जय दाशरथि-राम

यशोदा दुलाल, गोविंद गोपाल,
वृंदावन पुरंदर
गोपी-प्रिय-जन, राधिका-रामण
भुवन-सुंदर-बर

रवणांतकर, माखन-तस्कर,
गोपी-जन-वस्त्र- हरी
ब्रजेर राखाल, गोपा-वृंद-पाल,
चित्त- हरी बंशी-धारी

योगींद्र-बंदन, श्री-नंद-नंदन,
ब्रज-जन-भय-हरी
नवीन नीरद, रूप मनोहर,
मोहन-बंशी-बिहारी

यशोदा-नंदन, कंस निसूदन
निकुंज-रास-विलासी
कदंब कानन रास पारायण
बृंद-विपिन-निवासी

आनंद-वर्धन, प्रेम-निकेतन,
फुल-शर-जोजक काम
गोपांगनागण, चित्त- विनोदन
समस्त- गुण-गण-धाम

जामुन-जीवन, केलि पारायण,
मानस – चंद्र – चकोर
नाम सुधारस, गाओ कृष्ण जश,
राखो वचन मन मोर

ध्वनि

  1. श्री राधा कांत दास तथा भक्त वृन्द- इस्कॉन बैंगलोर