श्री गुरु वंदना

Śrī Guru-vandanā (in Hindi)

श्री गुरु-चरण-पद्म केवल भकति सद्म
बंदॊ मुयि सावधान मते
जाहार प्रसादे भाइ ए भव तोरिया जाइ
कृष्ण-प्राप्ति होय् जाहा ह’ते

गुरु-मुख-पद्म-वाक्य, चित्तेतॆ कॊरिया ऐक्य
आर् ना कोरिहो मने आशा
श्री गुरु-चरणे रति, ऎइ से उत्तम-गति,
जे प्रसादे पूरे सर्व आशा

चखु-दान् दिलो जेइ जन्मे जन्मे प्रभु सेइ
दिव्य-ज्ञान् हृदे प्रॊकाशितो
प्रेम-भक्ति जाहा होइते अविद्या विनाश जाते
वेदॆ गाय् जाहार चरितो

श्री गुरु करुणासिंधु, अधम जनर बंधु
लोकनाथ् लोकेर जीवन
हा हा प्रभु कोरो दोया, देहो मोरे पद-छाया,
एबे जश घुषुक् त्रिभुवन

ध्वनि

  1. श्री स्तोक कृष्ण दास तथा भक्त वृन्द- इस्कॉन बैंगलोर